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करो या मरो के मुकाबले से पहले भारत को चिंताओं को दूर करना होगा

January 27th, 2015 | by admin
करो या मरो के मुकाबले से पहले भारत को चिंताओं को दूर करना होगा
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सिडनी : भारतीय क्रिकेट टीम मंगलवार को पर्थ के लिए रवाना हो गई और उसे पता है कि शुक्रवार को इंग्लैंड के खिलाफ होने वाले त्रिकोणीय श्रृंखला के लगभग सेमीफाइनल जैसे मुकाबले से पहले उसे बल्लेबाजी और गेंदबाजी की अपनी चिंताओं को दूर करना होगा।

आस्ट्रेलिया के खिलाफ यहां सोमवार को मैच बारिश की भेंट चढ़ने के बावजूद टीम इंडिया सिडनी से खुशी के साथ लौटेगी।

भारतीय टीम यहां लंबे दौरे की थकान के बाद आई थी जो ब्रिसबेन में इंग्लैंड के खिलाफ टीम के लचर प्रदर्शन के दौरान साफ झलका। इस हार के बाद भारत को एक फरवरी को होने वाले फाइनल में क्वालीफाई करने के लिए अपने अगले दोनों मैच जीतने थे।

टीम ने दो दिन अभ्यास किया और दो दिन आराम किया। टीम प्रबंधन भी मैदान के भीतर और बाहर बिताए समय के बीच में संतुलन बनाने में सफल रहा और साथ ही टीम को बिना पसीना बहाए दो अंक भी मिल गए। अब शुक्रवार को टीम का इंग्लैंड के खिलाफ मुकाबला सेमीफाइनल की तरह हो गया है और इस मैच का विजेता रविवार को फाइनल में आस्ट्रेलिया से भिड़ेगा।

भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने टूर्नामेंट का इस्तेमाल प्रयोग के रूप में किया है। मेलबर्न में धोनी तीन तेज गेंदबाजों और दो स्पिनरों के साथ उतरे जबकि ब्रिसबेन में वह तीन तेज गेंदबाज और एक स्पिनर के साथ उतरे और साथ ही स्टुअर्ट बिन्नी ने आलराउंडर की भूमिका निभाई।

इंग्लैंड के खिलाफ अच्छे प्रदर्शन के कारण बिन्नी सिडनी मैच के लिए अंतिम 11 में जगह बनाने में सफल रहे और टीम इस मैच में दो स्पिनर और दो तेज गेंदबाजों के साथ उतरी थी। मैच की टीम का चयन हालांकि काफी हद तक परिस्थितियों पर भी निर्भर था क्योंकि बारिश हो रही थी। धोनी को बिन्नी की क्षमताओं पर भरोसा होने लगा है और वह विश्व कप टीम का हिस्सा भी हैं। कप्तान पहले ही काफी समय से तेज गेंदबाजी आलराउंडर की जरूरत पर बल देते रहे हैं जो गेंद को स्विंग करा सके।

इस बीच गेंदबाजी संयोजन के नये विकल्प खुले जब रविवार को मैच पूर्व प्रेस कांफ्रेंस में धोनी ने कहा कि इशांत शर्मा और रविंद्र जडेजा दोनों चयन के लिए उपलब्ध रहेंगे। उन्होंने हालांकि संकेत भी दिए कि ये नहीं खेलेंगे क्योंकि विश्व कप से पहले चोटों से परेशान रहे खिलाड़ियों के साथ जोखिम लेने की कोई जरूरत नहीं है।

कप्तान के अनुसार बाउंड्री पर क्षेत्ररक्षण की जडेजा की क्षमता अभी समीक्षा के दायरे में है। वह टीम होटल से अपने बायें कंधे पर बर्फ और पट्टी बांधकर निकले थे लेकिन इसके बाद सिडनी मैच में टास के समय वह अंतिम एकादश में शामिल थे।

टीम प्रबंधन ने शायद सोचा कि इंग्लैंड के खिलाफ पर्थ में होने वाला मैच फाइनल में जगह बनाने के लिए सबसे महत्वपूर्ण रहेगा और ऐसे में सोमवार को होने वाले मैच तक सभी प्रयोग कर लिए जाने चाहिए। अगर ऐसा है तो अंतिम एकादश में दो स्पिनरों जडेजा और अक्षर पटेल के चयन को समझा जा सकता है।

भारत छह बल्लेबाजों के साथ उतर सकता है और ऐसे में आर अश्विन निचले क्रम में बल्लेबाजी के कराण प्रभावी साबित हो सकता है। लेकिन जडेजा की अनुपस्थिति में अक्षर ने पहले घरेलू हालात और फिर यहां पहले दो मैचों में काफी अच्छा नियंत्रण दिखाया। उन्हें सातवें नंबर पर बल्लेबाजी करने का मौका भी दिया गया जिससे बल्ले से उनकी क्षमता को परखा जा सके लेकिन वह आईपीएल जैसी बल्लेबाजी करने में नाकाम रहे। बेशक मौके मिलने के साथ अक्षर के प्रदर्शन में सुधार होगा लेकिन क्या विश्व कप से पहले ऐसा करने के लिए पर्याप्त समय है।

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