ख़ाड़ी देशों में पढ़ रहे भारतीय छात्रों के लिए यह साल उम्मीदों के बजाय चिंता का कारण बन गया है। Central Board of Secondary Education (CBSE) द्वारा जारी किए गए कक्षा 12 के नतीजों ने Gulf Cooperation Council (GCC) देशों में रहने वाले हजारों परिवारों को हिलाकर रख दिया है। "बस एक मौका दे दो प्लीज़" — यह सिर्फ एक अनुरोध नहीं, बल्कि उन छात्रों की आवाज़ है जिनकी मेहनत एक नए मूल्यांकन मॉडल के कारण अधूरी लग रही है।
मध्य पूर्व में तनावपूर्ण स्थिति के बीच जब परीक्षाएं रद्द कर दी गईं, तो बोर्ड ने एक वैकल्पिक रास्ता चुना। लेकिन अब, जब नतीजे सामने आए हैं, तो छात्रों का मानना है कि इस प्रक्रिया ने उनकी वास्तविक क्षमता को नहीं दर्शाया। विशेष रूप से इंजीनियरिंग में दाखिले की होड़ में, अंकों का थोड़ा सा भी फर्क भविष्य बदल सकता है।
परीक्षा रद्द होने और नए मॉडल की कहानी
इस सारी गड़बड़ की शुरुआत उस समय हुई जब Israel-Iran tensionsMiddle East बढ़ीं। सुरक्षा संबंधी चिंताओं को देखते हुए, CBSE ने Saudi Arabia सहित अन्य खाड़ी देशों में कक्षा 12 की परीक्षाएं रद्द करने का फैसला लिया। यह कोई छोटा कदम नहीं था; इसका सीधा असर लाखों छात्रों पर पड़ा।
परीक्षा रद्द होने के कुछ ही दिनों बाद, बोर्ड ने एक 'नए मूल्यांकन मॉडल' (New Evaluation Model) का ऐलान किया। इस मॉडल के आधार पर ही छात्रों के अंक तय किए गए। समस्या यह है कि छात्रों का मानना है कि इस मॉडल ने उनके स्कूल के आंतरिक मूल्यांकन या वास्तविक प्रदर्शन को पूरी तरह से ध्यान में नहीं रखा। परिणामस्वरूप, कई ऐसे छात्र हैं जिन्हें अपनी मेहनत के मुताबिक अंक नहीं मिले हैं।
DASA नियमों का कठघरा: 75% की दीवार
सच्ची मुश्किल तब शुरू होती है जब बात कॉलेज एडमिशन की आती है। विदेश में रहने वाले छात्रों के लिए भारत में इंजीनियरिंग कॉलेजों में दाखिले का मुख्य रास्ता DASA (Direct Admission of Students Abroad) स्कीम है। इसके नियम बहुत स्पष्ट और कड़े हैं।
DASA के तहत पात्रता के लिए छात्रों को दो शर्तें पूरी करनी होती हैं:
- JEE Main परीक्षा में क्वालिफाई करना (और अच्छी रैंक लाना)।
- कक्षा 12वीं में कम से कम 75% अंक या 7.5 CGPA प्राप्त करना।
यहीं पर नया मूल्यांकन मॉडल एक बाधा बन गया। कई छात्रों के अंक 75% के निकट थे, लेकिन नए मॉडल के कारण वे इस सीमा से नीचे आ गए। बिना इस प्रतिशत के, चाहे JEE Main में रैंक कितनी भी अच्छी क्यों न हो, DASA के जरिए टॉप इंजीनियरिंग कॉलेजों में दाखिला मिलना लगभग नामुमकिन हो जाता है।
छात्रों की मांग: ग्रेस मार्क्स या कंपार्टमेंट?
इसी संदर्भ में 'Lubia' नाम की एक छात्रा या प्रतिनिधि ने जो कहा, वह हजारों छात्रों की निराशा को दर्शाता है। उनका कहना है कि CBSE, NTA (National Testing Agency) और DASA को मिलकर काम करना चाहिए।
लुबिया की दो मुख्य मांगें हैं:
- उन छात्रों को जो थोड़े अंक कम लाए हैं, उन्हें ग्रेस मार्क्स (Grace Marks) दिए जाएं ताकि वे 75% की सीमा पार कर सकें।
- अगर ग्रेस मार्क्स नहीं दिए जा सकते, तो छात्रों को सिर्फ एक विषय में नहीं, बल्कि सभी विषयों में कंपार्टमेंट परीक्षा देने का मौका दिया जाए। इससे वे अपना अकादमिक वर्ष बचा सकते हैं।
वे उम्मीद करते हैं कि अधिकारी इन मांगों को सुनेंगे और छात्रों के भविष्य को बचाने के लिए कोई रास्ता निकालेंगे।
साथी छात्रों के लिए विकल्प: रिवैल्यूएशन और स्कैन कॉपी
भारत में पढ़ रहे छात्रों के लिए बोर्ड ने कुछ राहतें दी हैं, हालांकि ये विकल्प GCC के छात्रों के लिए उतने आसान नहीं हो सकते। CBSE ने कक्षा 12 के पास प्रतिशत में 3% की गिरावट दर्ज की है, जो अब 85% पर आ गया है।
असंतुष्ट छात्रों के लिए प्रक्रिया इस प्रकार है:
- स्कैन आंसर शीट: छात्र अपनी उत्तर पुस्तिका की स्कैन कॉपी देख सकते हैं। इसकी अंतिम तिथि पहले 22 मई थी, जिसे बढ़ाकर 24 मई कर दिया गया है।
- वेरिफिकेशन: इसमें बोर्ड कुल अंकों की जांच करता है।
- रिवैल्यूएशन: यदि छात्र को लगता है कि किसी प्रश्न का अंक ठीक से नहीं दिया गया है, तो वे रिवैल्यूएशन के लिए आवेदन कर सकते हैं। ध्यान रहे, इस प्रक्रिया में अंक बढ़ भी सकते हैं और कम भी।
- डिजिटल मार्कशीट: नतीजे Digilocker और UMANG ऐप पर भी उपलब्ध हैं, जिसका उपयोग कॉलेज एडमिशन में किया जा सकता है।
लेकिन सवाल यह है कि क्या ये प्रक्रियाएं उन छात्रों के लिए पर्याप्त हैं जिनकी परीक्षाएं ही नहीं हुईं? क्या रिवैल्यूएशन से उनका 75% का टारगेट पूरा होगा? यही वो सवाल है जो अब तक बिना जवाब के है।
Frequently Asked Questions
GCC देशों में CBSE कक्षा 12 की परीक्षाएं क्यों रद्द की गईं?
मध्य पूर्व में इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और सुरक्षा संबंधी चिंताओं को देखते हुए, CBSE ने सऊदी अरब सहित अन्य खाड़ी देशों में कक्षा 12 की परीक्षाएं रद्द करने का निर्णय लिया था। इसके बाद एक वैकल्पिक मूल्यांकन मॉडल अपनाया गया।
DASA के तहत इंजीनियरिंग में दाखिले के लिए क्या योग्यता आवश्यक है?
DASA स्कीम के तहत दाखिले के लिए छात्रों को JEE Main परीक्षा में क्वालिफाई करना अनिवार्य है। इसके अलावा, उन्हें कक्षा 12वीं में कम से कम 75% अंक या 7.5 CGPA प्राप्त करना होता है। नए मूल्यांकन मॉडल के कारण कई छात्र इस 75% की सीमा को पूरा नहीं कर पा रहे हैं।
छात्रों की मुख्य मांगें क्या हैं?
छात्र प्रतिनिधि लुबिया और अन्य छात्रों की मांग है कि या तो कम अंक लाने वालों को ग्रेस मार्क्स दिए जाएं ताकि वे 75% की सीमा पार कर सकें, या फिर सभी विषयों में कंपार्टमेंट परीक्षा देने का मौका दिया जाए ताकि उनका अकादमिक वर्ष बच सके।
क्या छात्र अपने अंकों की जांच करा सकते हैं?
हाँ, CBSE ने छात्रों को अपनी उत्तर पुस्तिका की स्कैन कॉपी देखने, वेरिफिकेशन और रिवैल्यूएशन के विकल्प दिए हैं। स्कैन कॉपी देखने की अंतिम तिथि 24 मई तक बढ़ा दी गई है। हालांकि, रिवैल्यूएशन में अंक कम भी हो सकते हैं।
कक्षा 12 के इस बार के परिणामों में क्या बदलाव हुआ है?
इस बार कक्षा 12 के पास प्रतिशत में 3% की गिरावट दर्ज की गई है, जो अब 85% पर आ गया है। पिछले वर्षों की तुलना में यह एक महत्वपूर्ण बदलाव है, जिसके पीछे नए मूल्यांकन पैटर्न और अन्य कारकों को जिम्मेदार माना जा रहा है।